नाम हूँ मैं !!

क्या हुआ जो तुमने कहा, नहीं बन  सकती  मैं आत्म -निर्भर ,
पर खुद को भीड़ से अलग , स्वावलम्बी बना लेने का नाम हूँ मैं !
 सदियों तक रौंदा तुमने , मेरे आत्मा-सम्मान को ,
पर इस समाज की भट्टी में जल कर,
कुंदन बन आने का नाम हूँ मैं !
 कहा किसी ने मुझे , की नहीं हैं ,
कुछ पा लेने की हस्त -रेखाएं मेरी  हथेलियों  में !
उन  रेखाओं को हथेलियों से छील कर ,
आगे बढ़ आने का नाम हूँ मैं !
क्या हुआ जो तुमने कहा , वो आग नहीं मुझमे ,
पर सूरज की लौ लिए , सब कुछ जला देने और ,
सब कुछ बना देने , का  नाम हूँ मैं !
कुछ वक़्त तुम्हारा था , और  कुछ मेरा ना था ,
 पर वक़्त पे अपना नाम लिख आने का,
नाम हूँ मैं !!

28 thoughts on “नाम हूँ मैं !!

  1. कहा किसी ने मुझे , की नहीं हैं ,

    कुछ पा लेने की हस्त -रेखाएं मेरी  हथेलियों  में !

    उन  रेखाओं को हथेलियों से छील कर ,

    आगे बढ़ आने का नाम हूँ मैं !

    कितनी जोश के साथ लिखी गई पँक्तियाँ। ये शब्द नही ललकार है।

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